इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) वह कंपनी होती है जो आपको इंटरनेट से कनेक्ट करती है, डोमेन नामों को रिज़ॉल्व करती है, इंटरनेट ट्रैफिक को रूट करती है और इंटरनेट को संभव बनाने वाले नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने में मदद करने की ज़िम्मेदारी लेती है।

इस शब्द में मोबाइल (सेल फोन) ऑपरेटर भी शामिल हैं, जो बिना तार वाले सेल्युलर नेटवर्क(नई विंडो) पे मोबाइल इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध कराते हैं। ISP अक्सर ईमेल होस्टिंग, डोमेन नाम पंजीकरण, वेब होस्टिंग और मीडिया स्ट्रीमिंग जैसी दूसरी सेवाएं भी देते हैं। लेकिन यह उनका मुख्य काम नहीं है।

ISP कई रूपों, आकारों और साइज़ में मिलते हैं। हालांकि बाज़ार पर अक्सर अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की मालिकी वाली बड़ी कंपनियों का वर्चस्व रहता है, लेकिन छोटे स्थानीय ISP और सहकारी समितियां(नई विंडो) भी खूब हैं, जो अपने समुदायों की इंटरनेट ज़रूरतों को पूरा करती हैं (हालांकि ये अक्सर आखिर में अपना इंटरनेट एक्सेस बड़े ISP से लीज़ पे लेती हैं)।

इस लेख में हम देखेंगे कि ISP क्या हैं और कैसे काम करते हैं, फिर हम ISP के ज़्यादा विवादास्पद पहलुओं पे ध्यान देंगे।

इंटरनेट स्पीड कैसे मापी जाती है?

इंटरनेट स्पीड आमतौर पे मेगाबिट्स प्रति सेकेंड (Mbps) में मापी जाती है। एक मेगाबिट 1,024 किलोबिट के बराबर होता है, इसलिए 1 Mbps की स्पीड लगभग 1,000 किलोबिट्स प्रति सेकेंड (Kbps) के बराबर है। इसी तरह, 1 गीगाबिट प्रति सेकेंड (Gbps) लगभग 1,000 Mbps के बराबर है।

ब्रॉडबैंड एक शब्द है जो हमेशा चालू रहने वाली हाई-स्पीड इंटरनेट एक्सेस को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होता है। अमेरिका का फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) अभी ब्रॉडबैंड को ऐसे हमेशा-चालू कनेक्शन के रूप में परिभाषित करता है जो 25 Mbps की डाउनलोड स्पीड और 3 Mbps की अपलोड स्पीड देता है। हालांकि, वैश्विक औसत(नई विंडो) फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के लिए 76 Mbps डाउनलोड और 33 Mbps अपलोड है, और मोबाइल ब्रॉडबैंड के लिए 38 Mbps डाउनलोड और 10 Mbps अपलोड है।

डाउनलोड स्पीड आपके डिवाइस पे आने वाले डाटा को मापती है, जबकि अपलोड स्पीड आपके डिवाइस से जाने वाले डाटा को मापती है। ज़्यादातर निजी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए डाउनलोड स्पीड अपलोड स्पीड से ज़्यादा अहम होती है, इसलिए ज़्यादातर घरेलू ISP इसे प्राथमिकता देते हैं।

मेरा इंटरनेट कितना तेज़ होना चाहिए?

आपको अपने ISP से कितनी इंटरनेट स्पीड चाहिए, यह इस बात पे निर्भर करता है कि आप इंटरनेट पे क्या करना चाहते हैं। नीचे दिए गए आंकड़े एक अच्छी गाइडलाइन(नई विंडो) हैं, लेकिन ध्यान रखें कि इंटरनेट कनेक्शन इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति के लिए ये जुड़ जाते हैं।

तो अगर आप चार लोगों के घर में रहते हैं और हर कोई एक ही समय पे नियमित रूप से 4K वीडियो स्ट्रीम करता है, तो आपको अपने ISP से कम से कम 100 Mbps का पैकेज लेने पे विचार करना चाहिए।

  • सामान्य ब्राउज़िंग: 1 Mbps
  • स्टैंडर्ड-डेफिनिशन (SD) वीडियो स्ट्रीमिंग: 3 – 4 Mbps
  • हाई-डेफिनिशन (HD) वीडियो स्ट्रीमिंग: 5 – 8 Mbps
  • अल्ट्रा HD 4K वीडियो स्ट्रीमिंग: 25 Mbps
  • स्टैंडर्ड 1-1 वीडियो कॉल: 1 Mbps
  • HD 1-1 वीडियो कॉल: 1.5 Mbps
  • HD वीडियो टेलीकॉन्फ्रेंसिंग: 6 Mbps
  • गेम्स कंसोल को इंटरनेट से कनेक्ट करें: 3 Mbps
  • ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेमिंग: 4 Mbps

इंटरनेट कनेक्शन के प्रकार

ISP कई तरीकों से आपके डिवाइस को इंटरनेट से कनेक्ट कर सकते हैं।

डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन (DSL)

DSL इंटरनेट प्रदाता उन कॉपर टेलीफोन वायर का इस्तेमाल करते हैं जो पहले से ही ज़्यादातर घरों और दफ्तरों में मौजूद हैं।

रिहायशी प्रॉपर्टी से DSL कनेक्शन आमतौर पे असिमेट्रिक डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन(नई विंडो) (ADSL) टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करते हैं, जबकि बिज़नेस प्रॉपर्टी से ज़्यादातर कनेक्शन सिमेट्रिक डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन (SDSL) इस्तेमाल करते हैं। ADSL अपलोड स्पीड की तुलना में ज़्यादा डाउनलोड स्पीड देता है, जबकि SDSL दोनों दिशाओं में एक जैसी बैंडविड्थ देता है।

यूरोप के ज़्यादातर हिस्सों समेत कई देशों में DSL इंटरनेट कनेक्शन की सबसे आम किस्म है। कंज्यूमर DSL कनेक्शन आमतौर पे 256 Kbps से लेकर 100 Mbps से ज़्यादा की डाउनलोड स्पीड देते हैं, हालांकि सर्विस लेवल पे 940 Mbps तक की स्पीड सैद्धांतिक रूप से मुमकिन है।

केबल

केबल इंटरनेट प्रदाता वही कोएक्सियल केबल इस्तेमाल करते हैं जो कभी सिर्फ केबल टीवी देती थी। इसलिए यह संयोग नहीं है कि कई केबल टीवी सेवाएं ISP बन गई हैं, जो अपने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके केबल टीवी एक्सेस के साथ इंटरनेट एक्सेस भी देती हैं।

केबल इंटरनेट उन देशों में लोकप्रिय है जहां केबल टीवी की पहुंच ज़्यादा है (जैसे अमेरिका)। यह डाटा भेजने का बेहद असरदार तरीका है, और 60 Mbps से 2 Gbps तक की डाउनलोड स्पीड दे सकता है।

फाइबर

फाइबर इंटरनेट फाइबर-ऑप्टिक केबल (कांच की तारों जो सैद्धांतिक रूप से डाटा को रोशनी की रफ्तार से भेज सकती हैं) के ज़रिए आपकी प्रॉपर्टी तक पहुंचाया जाता है। DSL और केबल के उलट, यहां कोई पहले से मौजूद फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होता जिसका फायदा उठाया जा सके, इसलिए इंटरनेट कंपनियों को अपने नेटवर्क बढ़ाने के लिए नई फाइबर ऑप्टिक केबल बिछानी पड़ती हैं।

अमेरिका की लगभग 39% आबादी को फाइबर इंटरनेट का एक्सेस है, लेकिन एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में ये आंकड़े बहुत ज़्यादा हैं। फाइबर इंटरनेट की डाउनलोड स्पीड लगभग 20 Mbps से 2 Gbps तक होती है।

सेल्युलर

मोबाइल सेवा प्रदाता आपके फोन तक इंटरनेट को बेस स्टेशन ट्रांसीवर (जिन्हें अक्सर सेल टावर कहा जाता है) की सीरीज़ के ज़रिए रेडियो फ्रीक्वेंसी से भेजते हैं।

ऐसे हर टावर से सर्विस दिया जाने वाला ज़मीनी इलाका अक्सर षट्भुजाकार होता है और उसे सेल कहा जाता है। अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क प्रदाताओं के कई टावर एक ही सेल को कवर कर सकते हैं और अक्सर करते भी हैं। सेल टावर आपस में और टेलीफोन स्विच या एक्सचेंज से कनेक्ट होते हैं, जिससे एक जटिल वेब बनता है जो सेल फोन उपयोगकर्ताओं को सबसे व्यापक कवरेज देता है।

सेल्युलर नेटवर्क सेल

इंटरनेट डाटा अलग-अलग रेडियो फ्रीक्वेंसी के ज़रिए सेल टावर और आपके मोबाइल इंटरनेट डिवाइस के बीच भेजा और प्राप्त किया जाता है। इसकी टेक्नोलॉजी 1G से शुरू होकर पीढ़ियों के दौरान विकसित हुई है। अभी 3G और 4G नेटवर्क अब भी व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं, लेकिन 5G सबसे नया स्टैंडर्ड है और यह (खासकर शहरी इलाकों में) लगातार उपलब्ध होता जा रहा है।

जो मोबाइल नेटवर्क अब भी 4G इस्तेमाल करते हैं, वे 6 GHz से नीचे की रेडियो फ्रीक्वेंसी पे निर्भर करते हैं, जबकि 5G नेटवर्क बहुत ज़्यादा फ्रीक्वेंसी, 30 GHz से 300 GHz की रेंज में, इस्तेमाल करते हैं। ये फ्रीक्वेंसी ज़्यादा बैंडविड्थ और ज़्यादा दिशात्मक सिग्नल की अनुमति देती हैं, जिससे इंटरफ़ेरेंस कम होती है।

नतीजा यह है कि 5G नेटवर्क 50 Mbps से 1 Gbps तक की स्पीड दे सकते हैं, यानी ये सैद्धांतिक रूप से DSL, केबल और फाइबर जैसे ज़्यादा पारंपरिक वायर्ड नेटवर्क की जगह ले सकते हैं।

सैटेलाइट

सैटेलाइट इंटरनेट बिना तार वाला इंटरनेट है जो पृथ्वी के चक्कर लगाते सैटेलाइट से भेजा जाता है। ज़्यादा पारंपरिक सैटेलाइट इंटरनेट सिस्टम इसके लिए जियोस्टेशनरी सैटेलाइट इस्तेमाल करते हैं, लेकिन एलन मस्क की Starlink(नई विंडो) से प्रतिनिधित्व होने वाली नई पीढ़ी का सैटेलाइट इंटरनेट इसकी जगह सैटेलाइट इंटरनेट कंस्टेलेशन (नई विंडो)इस्तेमाल करता है।

चूंकि डाटा को अंतरिक्ष तक जाकर वापस आना पड़ता है, सैटेलाइट कनेक्शन की लेटेंसी बहुत ज़्यादा हो सकती है। इसके अलावा, मौसम और एक साथ सर्विस इस्तेमाल करने वालों की संख्या से कनेक्शन स्पीड पर बुरा असर पड़ सकता है। डाटा लिमिट भी आम हैं।

हालांकि, दूरदराज़ के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कई लोगों के लिए सैटेलाइट अक्सर उपलब्ध एकमात्र इंटरनेट सर्विस होती है। इसीलिए सैटेलाइट सर्विस घनी आबादी वाले यूरोप की तुलना में अमेरिका और कनाडा जैसी जगहों पे (जहां यह लगभग हर किसी को उपलब्ध है) ज़्यादा आम है। सैटेलाइट इंटरनेट 12 Mbps से 100 Mbps की रेंज में डाउनलोड स्पीड दे सकता है।

डायल-अप

1990 के दशक में डायल-अप इंटरनेट एक्सेस ने पहली बार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ऑनलाइन दुनिया खोल दी। ब्रॉडबैंड के उलट, डायल-अप इंटरनेट “हमेशा चालू” नहीं होता — आप अपनी लैंडलाइन फोन लाइन से एक एक्सेस नंबर पे कनेक्ट करते हैं। जब तक आप कनेक्ट हैं, आप अपनी फोन लाइन इस्तेमाल नहीं कर सकते।

सिर्फ 56 kbps की ज़्यादा से ज़्यादा स्पीड के साथ, डायल-अप इंटरनेट लगभग पुराना हो चुका है। हालांकि, 2019 में अमेरिका में लगभग 2% लोग अब भी इसकी कम लागत और दूरदराज़ के ग्रामीण इलाकों में विकल्पों की कमी की वजह से डायल-अप कनेक्शन इस्तेमाल करते थे।

क्या इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) वाई-फाई प्रदाता के समान है?

नहीं, लेकिन इसमें उलझन हो सकती है। वाई-फाई एक टेक्नोलॉजी है जो आपके डिवाइस तक 2.4 GHz, 5 GHz और अब 6 GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी पे बिना तार इंटरनेट पहुंचाती है। ये रेडियो फ्रीक्वेंसी सिर्फ छोटी दूरी तक ही डाटा भेज सकती हैं (2.4 GHz नेटवर्क के लिए 150 फीट / 45 मीटर, 5 GHz नेटवर्क के लिए 75 फीट / 23 मीटर, और 6 GHz नेटवर्क के लिए 50 फीट / 15 मीटर)।

अगर सिग्नल को दीवारों और दरवाज़ों जैसी रुकावटों से गुज़रना पड़े तो ये रेंज और भी छोटी हो सकती हैं।

यह वाई-फाई सिग्नल आपके राऊटर से प्रसारित होता है। ISP अक्सर ग्राहकों को कंबाइंड मॉडेम (इंटरनेट से कनेक्ट होने के लिए ज़रूरी हार्डवेयर) और वाई-फाई राऊटर देते हैं, जिससे यह भ्रांति पैदा होती है कि ISP और वाई-फाई प्रदाता एक ही चीज़ हैं।

हालांकि, आप तीसरें-पार्टी का राऊटर इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप अपना राऊटर चुनते हैं, तो आपका ISP अब भी आपके घर तक इंटरनेट देगा, लेकिन आपके चुने हुए राऊटर से वाई-फाई सिग्नल प्रसारित होगा जो आपके वाई-फाई सक्षम डिवाइस तक इंटरनेट पहुंचाता है।

How WiFi works

इसलिए “वाई-फाई प्रदाता” शब्द सबसे ठीक रूप से उस संगठन पर लागू होता है जो वाई-फाई सिग्नल देता है, न कि उस ISP पर जो वाई-फाई प्रदाता को इंटरनेट एक्सेस देता है। आपके घर के बाहर, यह आपका दफ्तर, कोई कैफे या एयरपोर्ट लाउंज हो सकता है।

ISP और निजता

आपका ISP आपका इंटरनेट कनेक्शन देता है, यानी वह आपके इंटरनेट ट्रैफिक की निगरानी कर सकता है। अगर आप कोई ऐसी वेबसाइट खोलते हैं जो HTTPS इस्तेमाल नहीं करती, तो आपका ISP उस साइट पे आपकी हर चीज़ देख सकता है — जिनमें आप कौन-कौन से वेब पेज खोलते हैं और आपने जो फॉर्म भरे हैं उनकी सामग्री भी शामिल है (जिनमें पेमेंट की जानकारी भी शामिल है)।

खुशकिस्मती से, आजकल लगभग सभी वेबसाइटें HTTPS इस्तेमाल करती हैं। हालांकि, आपका ISP अब भी यह देख सकता है कि आप कौन-कौन सी वेबसाइटें खोलते हैं, भले ही वह न देख सके कि आप उन पे क्या करते हैं। यह अब भी निजता के लिए एक बड़ा खतरा है। उदाहरण के लिए, अगर आप नियमित रूप से gop.com खोलते हैं तो आपका राजनीतिक झुकाव, अगर आप Tinder इस्तेमाल करते हैं तो आपका रिश्ते का स्टेटस, और अगर आप फिशिंग टैकल वेबसाइटें ज़्यादा देखते हैं तो आप खाली समय में क्या करना पसंद करते हैं, यह आसानी से पता लगाया जा सकता है।

इस बात से कि ISP हर वेबसाइट देख सकते हैं जो आप खोलते हैं, उनके कई फायदे हैं (जिनमें से कोई भी आपके, ग्राहक के लिए अच्छा नहीं है)।

ISP और सरकारी निगरानी

हालांकि सरकारों के लिए केबल, फाइबर, या DSL के लिए इस्तेमाल होने वाली कॉपर फोन लाइनों में सीधे टैप करके लक्षित इंटरनेट निगरानी करना तकनीकी रूप से मुमकिन है, लेकिन मास निगरानी के लिए बस ISP को अपने ग्राहकों की गतिविधियों के लॉग रखने के लिए कह देना बहुत आसान है। दुनिया भर के ज़्यादातर ISP कानूनी रूप से ऐसे लॉग रखने के लिए बाध्य हैं।

उदाहरण के लिए, EU में लगभग सभी सदस्य देशों ने 2006 डाटा रिटेंशन डायरेक्टिव(नई विंडो) (DDR) को स्थानीय कानून में शामिल कर लिया है, जिसके तहत ISP को अपने ग्राहकों की ब्राउज़िंग गतिविधियों के लॉग रखने और कम से कम 12 महीने तक उन लॉग को रखने की ज़रूरत थी। और 2014 में यूरोपीय संघ के न्याय अदालत ने इसे मानवाधिकारों के आधार पे अमान्य घोषित किए जाने के बावजूद, किसी EU देश ने कानून के अपने स्थानीय क्रियान्वयन को वापस नहीं लिया है।

भारत की सरकार ने हाल ही में व्यापक नए कानून पास किए हैं जो उसे भारतीय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं पे रियल टाइम में जासूसी करने के लिए ISP का इस्तेमाल करने की लगभग असीमित शक्तियां देते हैं, और UK का Investigatory Powers Act 2016(नई विंडो) (जिसे “Snoopers Charter” भी कहा जाता है) ISP को ग्राहकों की ब्राउज़िंग हिस्ट्री 12 महीने तक स्टोर करने(नई विंडो) के लिए कहता है।

कोई अनिवार्य डाटा रिटेंशन कानून नहीं होने के बावजूद, NSA व्हिसलब्लोअर एडवर्ड स्नोडन द्वारा जारी किए गए सबूत दिखाते हैं कि अमेरिकी सरकार मास निगरानी कार्यक्रमों में सहयोग करने के लिए ISP को बड़े पैमाने पे नेशनल सिक्योरिटी लेटर(नई विंडो) (NSL) जारी करती है। और चूंकि इन NSL के साथ हमेशा गैग ऑर्डर(नई विंडो) होते हैं, इस पर कोई सार्वजनिक जवाबदेही नहीं है।

ISP और सेंसरशिप

ज़्यादातर ISP को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आप इंटरनेट पे क्या करते हैं, लेकिन इंटरनेट तक आपके गेटवे के रूप में वे तय कर सकते हैं कि आप कौन सी वेबसाइटें खोल सकते हैं और कौन सी नहीं। इसका मतलब है कि किसी दमनकारी सरकार को अपने इंटरनेट पर सेंसरशिप लागू करने के लिए बस अपने ISP पर कानूनी पाबंदियां लगानी हैं जिनमें उन्हें राजनीतिक, सामाजिक, या धार्मिक आधार पे अपनी पसंद की सामग्री के ब्लॉक लागू करने के लिए कहा जाए।

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ISP और नेट न्यूट्रैलिटी

नेट न्यूट्रैलिटी का सिद्धांत है कि सभी इंटरनेट ट्रैफिक को बराबर माना जाए। इसका मतलब है कि उपयोगकर्ता, सामग्री, साइट, प्लैटफॉर्म, एप्लीकेशन, जुड़े हुए उपकरण की किस्म, या संचार के मोड के आधार पे भेदभाव न करना या अलग-अलग शुल्क न लेना।

नेट न्यूट्रैलिटी को अक्सर एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और खुले इंटरनेट की बुनियादी स्तंभ माना जाता है, और इसके बिना इंटरनेट का आज की तरह वैश्विक ताक़त बनना मुश्किल है। ज़्यादातर इंटरनेट उपभोक्ता नेट न्यूट्रैलिटी के पक्ष में हैं, लेकिन कई ISP इसे ज़्यादा पैसा कमाने में बाधा मानते हैं।

आपकी सरकार द्वारा लगाए गए सख्त नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के बिना, ISP दो (या ज़्यादा) लेन वाला इंटरनेट बना सकते हैं, जिसमें पूरा इंटरनेट एक्सेस सिर्फ उन्हें मिले जो प्रीमियम दे सकें, जबकि सस्ते प्लैन सिर्फ केबल जैसे इंटरनेट सेवाओं के “पैकेज” तक ही एक्सेस देते हैं।

नेट न्यूट्रैलिटी के बिना, ISP प्रतिद्वंद्वी सेवाओं के ट्रैफिक के साथ भेदभाव (उसे धीमा करके या “थ्रॉटल” करके) भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, 2014 में Netflix ने Comcast से समझौता किया ताकि दूसरों की तुलना में उसकी स्ट्रीमिंग(नई विंडो) सर्विस को प्राथमिकता दी जाए।

बैंडविड्थ थ्रॉटलिंग के बारे में और जानें

नेट न्यूट्रैलिटी यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया (VoIP ट्रैफिक को छोड़कर), भारत, कनाडा और कई दूसरे देशों में कानूनी रूप से लागू(नई विंडो) है। अमेरिका में, फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने 2017 में मौजूदा नेट न्यूट्रैलिटी नियमों को रद्द(नई विंडो) कर दिया, और दुनिया के दूसरे हिस्सों में ऐसे नियम कभी मौजूद ही नहीं थे।

ISP और विज्ञापन

आपका ISP आपके बारे में बहुत कुछ जानता है — Facebook या Google से भी ज़्यादा, जिन्होंने आपकी हर हरकत की निगरानी करके और उस जानकारी का इस्तेमाल करके आपके ब्राउज़र विंडो में बेहद लक्षित विज्ञापन दिखाकर दौलत कमाई है। आपका ISP आपके बारे में जो जानता है वह बेहद क़ीमती है।

ज़्यादातर देशों में, ISP अपने ग्राहकों का डाटा नहीं बेच सकते। लेकिन अमेरिका में, 2017 से ISP को ग्राहकों का डाटा तीसरें-पार्टी को बेचने की इजाज़त(नई विंडो) है, जब कांग्रेस ने FCC के उन निजता नियमों को खत्म करने वाला प्रस्ताव पास किया जो इस प्रथा पर रोक लगाते थे।

उस समय, AT&T, Comcast और Verizon जैसे बड़े अमेरिकी ISP ने कहा था कि उनके ग्राहक डाटा कलेक्शन से ऑप्ट आउट कर सकेंगे। बदकिस्मती से, इन ISP का अपने उपयोगकर्ताओं के निजता अधिकारों का सम्मान करने का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है, और T-Mobile, Sprint और AT&T सभी को अपने मोबाइल ग्राहकों की ब्राउज़िंग हिस्ट्री बेचते(नई विंडो) पकड़ा गया है।

मेरा ISP कौन है?

अगर आपको यक़ीन नहीं है कि आपका ISP कौन है, तो अपने ब्राउज़र में हमारा फ्री सिक्योर IP स्कैनर(नई विंडो) खोलें और ISP Name देखें।

To find out who your ISP is, go to our free secure IP scanner

VPN और ISP

जब आप VPN इस्तेमाल करते हैं, तो आपके डिवाइस और Proton VPN जैसे प्रोवाइडर के VPN सर्वर के बीच एन्क्रिप्ट किया कनेक्शन बनता है। इससे आपका ISP आपके डाटा की सामग्री की जांच नहीं कर पाता।

VPN सर्वर आपकी सभी DNS क्वेरी हैंडल करता है और एक मध्यस्थ के रूप में काम करता है जो आपके डिवाइस और इंटरनेट के बीच बैठता है, आपके डाटा को सही जगहों तक रूट करता है। इससे आपका ISP यह नहीं देख पाता कि आप इंटरनेट पे कौन सी वेबसाइटें खोलते हैं।

VPN कैसे काम करता है, इसके बारे में और जानें

VPN कैसे काम करते हैं

VPN इस्तेमाल करने से आपका ISP यह नहीं देख पाता कि आप इंटरनेट पे क्या करते हैं। और अगर आपका ISP आपकी ऑनलाइन गतिविधि नहीं देख सकता, तो वह वह जानकारी आपकी सरकार को नहीं दे सकता, आपको विज्ञापनों से टारगेट नहीं कर सकता, या आपके कनेक्शन को थ्रॉटल करने का फैसला नहीं कर सकता।

हालांकि, अब आपकी VPN सर्विस वह सब कुछ देख सकती है जो आपका ISP वरना देख सकता था। लेकिन ISP के उलट, मान्यता प्राप्त VPN सेवाएं आपकी निजता की रक्षा के लिए बनाई गई हैं। ज़्यादातर के पास सख्त नो-लॉग नीतियां हैं, जो उन्हें कोई ऐसा डाटा रखने से रोकती हैं जो आपकी निजता से छेड़छाड़ कर सके।

इसके अलावा, VPN शेयर किए गए IP पतों का इस्तेमाल करते हैं ताकि यह पता लगाना मुश्किल हो कि किसी दिए गए समय पे कौन IP पता इस्तेमाल कर रहा था, और (ज़्यादातर ISP के उलट) कम से कम आपकी निजता से छेड़छाड़ के कानूनी प्रयासों का विरोध करने की कोशिश करेंगे।

हालांकि, आप अपने VPN प्रोवाइडर पे बहुत भरोसा करते हैं, इसलिए ऐसा प्रोवाइडर चुनना बेहद ज़रूरी है जो वाकई भरोसेमंद हो। Proton VPN को CERN में मिले वैज्ञानिकों ने बनाया। हमारे सभी ऐप ओपन सोर्स हैं, इसलिए आप खुद कोड देख सकते हैं। हम अपने कोड के नियमित तीसरें-पार्टी ऑडिट भी प्रकाशित करते हैं ताकि आप विशेषज्ञों के आकलन देख सकें।

Proton VPN का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में है, जिसके पास दुनिया के सबसे मज़बूत निजता कानून हैं। हम सिर्फ कोई ऐसा लॉग नहीं रखते जो आपकी निजता से छेड़छाड़ कर सके, बल्कि हमें कानूनी रूप से लॉगिंग शुरू करने के लिए भी मजबूर नहीं किया जा सकता।

Proton VPN पर दुनिया भर के पत्रकार, कार्यकर्ता और लाखों आम लोग भरोसा करते हैं। Proton की सिफारिश संयुक्त राष्ट्र भी करता है और इसे यूरोपीय आयोग का सहायता भी मिलती है।

अंतिम विचार

आपको अपना इंटरनेट कनेक्शन देने के लिए अपने ISP की ज़रूरत है, लेकिन आप नहीं चाहते कि वह जाने आप ऑनलाइन क्या करते हैं। आमतौर पे आपका ISP आपकी ऑनलाइन लगभग हर चीज़ जानता है, और उनमें से कई इस स्थिति का गलत इस्तेमाल करते हैं (या तो अपने फायदे के लिए या सरकारी मास निगरानी और सेंसरशिप की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए)।

एक अच्छी VPN सर्विस (जैसे Proton VPN) आपके ISP को आपकी इंटरनेट गतिविधि पे जासूसी करने से रोकेगी और इंटरनेट पे आपकी निजता की रक्षा भी करेगी।

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