जब भी आप कुछ ऑनलाइन करते हैं, तो अपने पीछे जानकारी का निशान छोड़ जाते हैं जिसका इस्तेमाल आपको खास तौर पे पहचानने और ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है। यही आपका डिजिटल फुटप्रिंट(नई विंडो) है। इस लेख में हम देखेंगे:
- डिजिटल फुटप्रिंट क्या है?
- डिजिटल फुटप्रिंट के उदाहरण
- आपका डिजिटल फुटप्रिंट क्यों मायने रखता है?
- अपना डिजिटल फुटप्रिंट कैसे चेक करें
- अपना डिजिटल फुटप्रिंट कैसे सुरक्षित रखें
- शक होने पे ओपन सोर्स को विश्वसनीय मानें
डिजिटल फुटप्रिंट क्या है?
डिजिटल फुटप्रिंट को दो मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है:
- एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट: जानकारी जिसे आप जान-बूझकर शेयर करते हैं, जैसे सोशल मीडिया पोस्ट, ईमेल(नई विंडो), और फॉर्म भरना।
- पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट: डाटा जो आपकी साफ जानकारी के बिना इकट्ठा किया जाता है, जैसे कुकी जो आपकी ब्राउज़िंग आदतों को ट्रैक करती हैं, वेबसाइटें जो आपके उन पे जाने पे आपका IP पता लॉग करती हैं, और ऐप जो आपका स्थान डाटा रिकॉर्ड करते हैं।
ज़ाहिर है, ये साफ-सुथरे बंटवारे नहीं हैं। सबसे अहम बात ये है कि Google और Facebook(नई विंडो) जैसी कंपनियां, जिनके बिज़नेस मॉडल आपकी निजता के हनन पे टिके हैं ताकि आपको ज़्यादा व्यक्तिगत विज्ञापनों से बेहतर टारगेट कर सकें, आपके पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट को आपके एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट के ज़रिए जताई गई असली दुनिया की पहचान के साथ मैप करने में बेहद माहिर हैं।
डिजिटल फुटप्रिंट के उदाहरण
एक्टिव और पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट के उदाहरणों में शामिल हैं:
एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट
- सोशल मीडिया पोस्ट: Instagram, Facebook, या LinkedIn जैसे प्लैटफॉर्म पे शेयर किए गए अपडेट, फोटो, वीडियो, या कमेंट
- ईमेल: खासकर तब, जब Gmail जैसी “फ्री” ईमेल सर्विसेज़ का इस्तेमाल किया जाए जो आपकी निजता के हनन से कमाई करती हैं
- ऑनलाइन रिव्यू: Yelp, Amazon, या Google Reviews जैसे प्लैटफॉर्म पे छोड़े गए सुझाव
- फॉर्म भरना: जानकारी जो आप ऑनलाइन रजिस्टर करते समय, सर्वे पूरा करते समय, या कॉन्टेस्ट में दर्ज होते समय देते हैं
- कंटेंट अपलोड: वीडियो जिन्हें आप YouTube पे अपलोड करते हैं, ब्लॉग पोस्ट, या क्लाउड स्टोरेज पे शेयर की गई फ़ाइलें
- ऑनलाइन खरीदारी: आपकी शॉपिंग हिस्ट्री, प्रोडक्ट रिव्यू, और विशलिस्ट में जोड़ी गई चीज़ें
पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट
- कुकी और ट्रैकिंग डाटा: जानकारी जो वेबसाइटें आपकी ब्राउज़िंग आदतों के बारे में इकट्ठा करती हैं, जिनमें वो साइटें शामिल हैं जिन पर आप जाते हैं और वो प्रोडक्ट जिन्हें आप देखते हैं।
- IP पता लॉग: उन वेबसाइटों और सर्विसेज़ द्वारा इकट्ठा किए गए आपके स्थान और यूनीक पहचानकर्ता के रिकॉर्ड जिन्हें आप एक्सेस करते हैं।
- सर्च हिस्ट्री: क्वेरी जो आप Google या Bing जैसे सर्च इंजन में टाइप करते हैं (हमारा लेख निजता-केंद्रित Google विकल्प(नई विंडो) पर देखें)।
- ऐप इस्तेमाल डाटा: Android और iOS ऑपरेटिंग सिस्टम बैकग्राउंड में ट्रैक करते हैं कि आप कौन-से ऐप कब और कैसे इस्तेमाल करते हैं, और अक्सर ये जानकारी ऐप डेवलपर्स के साथ शेयर करते हैं।
- स्थान डाटा: आपके मोबाइल डिवाइस और ऐप्स से GPS ट्रैकिंग।
- कनेक्टेड डिवाइस: स्मार्ट डिवाइस (जैसे वियरेबल और स्मार्ट टीवी) इंटरनेट से इंटरैक्ट करते समय शेयर की गई जानकारी।
आपका डिजिटल फुटप्रिंट क्यों ज़रूरी है?
आपका एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये आपकी ऑनलाइन पहचान तय करता है, और दुनिया को बताता है कि आप कौन हैं, आपकी दिलचस्पी क्या है, और आपके लिए क्या मायने रखता है। आपकी ओर से ऑनलाइन स्वेच्छा से बताई गई चीज़ों के संभावित रूप से गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, नियोक्ता अक्सर भर्ती के दौरान ऑनलाइन प्रोफ़ाइल चेक करते हैं, इसलिए पोस्ट, कमेंट या फोटो आपके बारे में उनकी सोच (पॉज़िटिव या नेगेटिव) पर असर डाल सकते हैं। यही बात कॉलेज, स्कॉलरशिप कमिटी, और संभावित बिज़नेस पार्टनर पर भी लागू होती है, जो आपकी ऑनलाइन मौजूदगी की जांच कर सकते हैं। और बेशक, ऑनलाइन कही गई कुछ बातें आपराधिक या दीवानी कानूनी कार्रवाई की वजह भी बन सकती हैं।
आपका पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट मुख्य रूप से ऐसी कमर्शियल कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, जो आपके बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानना चाहती हैं ताकि वो आपको चीज़ें बेच सकें(नई विंडो) ज़्यादा असरदार तरीके से (या कम से कम ऐसा दावा कर सकें)। इसकी निगरानी अक्सर आपकी सरकार(नई विंडो) और दूसरी सरकारें (जैसे 5 Eyes जासूसी गठजोड़) भी करती हैं।
संदिग्ध मकसद वाले गुप्त संगठनों द्वारा आपकी बेहद निजी जानकारी का ज़खीरा इकट्ठा करने से पैदा होने वाले खतरे इस आर्टिकल के दायरे से बाहर हैं, लेकिन निजता एक मानवाधिकार है, और ये हमेशा याद रखने लायक है कि जानकारी ही ताकत है।
अपना डिजिटल फुटप्रिंट कैसे चेक करें
Facebook, Instagram, Twitter, या LinkedIn जैसे प्लैटफॉर्म पे अपने सोशल मीडिया खातों की समीक्षा करके आप अपना एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट चेक कर सकते हैं। ऐसी पब्लिक पोस्ट, फोटो, या कमेंट ढूंढें जिन्हें आप हटाना या निजी करना चाहें। आपको अपनी निजता सेटिंग भी चेक करनी चाहिए ताकि सिर्फ आपके इच्छित दर्शक ही आपका कंटेंट देख सकें। ये जानने के लिए कि संभावित नियोक्ता और आम लोग ऑनलाइन आपके बारे में क्या जान सकते हैं, वही करें जो वो करते हैं: Google पे खुद को सर्च करें।
लेकिन अपना पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट चेक करना (यानी बड़ी टेक कंपनियां, सरकारें, और यहां तक कि अलग-अलग वेबसाइटें आपके बारे में क्या जानती हैं) लगभग नामुमकिन है, क्योंकि ये जानकारी आपको देना उनके हित में नहीं है (असल में इसके बिल्कुल उलट)।
अपने डिजिटल फुटप्रिंट को कैसे सुरक्षित रखें
बड़ी हद तक, आपके अपने एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट पे आपका कंट्रोल है। आप तय करते हैं कि आप क्या कहते हैं, क्या शेयर करते हैं, और ऑनलाइन खुद को कैसे पेश करते हैं। दुनिया के कई हिस्सों में सिर्फ अच्छे रहना और इस बात का ध्यान रखना कि ऐसी पर्सनल जानकारी न दें जिसका फायदा अपराधी उठा सकें (उदाहरण के लिए, आप या आपके जानने वालों के खिलाफ सोशल इंजीनियरिंग अटैक शुरू करने के लिए), ये सुनिश्चित करने के लिए काफी हो सकता है कि आपका एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट कोई नुकसान न करे।
ज़रूरत पड़ने पर, आप पुरानी पोस्ट मिटा सकते हैं और अपनी सोशल सिक्योरिटी सेटिंग कड़ी कर सकते हैं (उदाहरण के लिए, ये सुनिश्चित करके कि सिर्फ दोस्त ही आपकी पोस्ट पढ़ें)। बेशक, ऐसे प्लैटफॉर्म पे पोस्ट किया गया कंटेंट जिन पे एक्सेस सीमित करने की सुविधा नहीं है (जैसे भेजे गए ईमेल), उसे कंट्रोल करना कहीं ज़्यादा मुश्किल है। कुछ देशों (खासकर EU के देशों(नई विंडो)) में right to be forgotten(नई विंडो) कानून हैं जिनके तहत सर्च इंजन को आपके बारे में पर्सनल जानकारी सर्च से हटानी होती है अगर वो अब प्रासंगिक नहीं है। फिर भी, ज़्यादातर जगहों पे आप बस इतना कर सकते हैं कि प्लैटफॉर्म होल्डर (जैसे Google) से जानकारी हटाने का अनुरोध करें।
आम तौर पे अपना पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट सुरक्षित रखना कहीं ज़्यादा मुश्किल है, लेकिन इसे छोटा करने के लिए आप कुछ कदम उठा सकते हैं। इनमें से कुछ सबसे ज़रूरी कदम ये हैं:
VPN इस्तेमाल करें
डिफॉल्ट रूप से, आपकी विज़िट की गई हर वेबसाइट आपके IP पते का इस्तेमाल करके आपकी यूनीक पहचान कर सकती है। अपना पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट सुरक्षित करने का पहला कदम है अपना IP पता छिपाना, जो Proton VPN जैसी VPN सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से हासिल किया जा सकता है। VPN आपके कनेक्शन को VPN सर्वर से रूट करता है ताकि आपकी विज़िट की गई वेबसाइटें उसका IP पता देखें, आपका असली IP पता नहीं। कनेक्शन एन्क्रिप्ट भी किया जाता है ताकि दूसरे थर्ड पार्टी (जैसे आपका ISP और उसके ज़रिए आपकी सरकार) ये न देख सकें कि आप ऑनलाइन क्या करते हैं।
अच्छी VPN सर्विसेज़ आपका डिजिटल फुटप्रिंट और भी कम कर देती हैं, क्योंकि वो आपकी ऑनलाइन गतिविधि के कोई लॉग नहीं रखतीं (Proton VPN की सख्त लॉग-नहीं नीति की सालाना इंडिपेंडेंट ऑडिट होती है)। Proton VPN अतिरिक्त रूप से NetShield Ad-blocker, भी ऑफर करता है, जो एक DNS फ़िल्टरिंग खासियत है जो आपको ट्रैकर (और मालवेयर) से बचाने में मदद करती है।
VPN कैसे काम करते हैं, इसके बारे में और जानें
ईमेल नकली-नाम इस्तेमाल करें
जिस भी सर्विस के लिए आप साइनअप करते हैं, वो आपसे सोशल मीडिया खाते से साइनइन करने को कहती है, या उसके ना होने पे, चालू ईमेल पते से। ईमेल से रजिस्टर करना अपनी सोशल मीडिया जानकारी शेयर करने की तुलना में कहीं ज़्यादा निजता-अनुकूल है (जो कुछ नहीं बल्कि सर्विस और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के बीच आपसी डाटा-शेयरिंग व्यवस्था है, जिसमें नुकसान सिर्फ आपकी निजता का होता है), लेकिन इससे भी सर्विस आपकी यूनीक पहचान कर सकती है।
सबसे अच्छा समाधान है डिस्पोज़ेबल ईमेल पते इस्तेमाल करना और जिस भी सर्विस के लिए साइनअप करें, उसके लिए नया पता बनाना। लेकिन ये थकाऊ हो सकता है, खासकर अगर आपको कुछ को न्यूज़ और सूचनाएं पाने के लिए और खाता रिकवरी के लिए चालू रखना हो। लेकिन Proton Pass की hide-my-email(नई विंडो) खासियत के साथ, आप अपनी इस्तेमाल की हर सर्विस के लिए आसानी से नया नकली-नाम बना सकते हैं। नकली-नाम पते पे भेजे गए ईमेल आपके Proton Mail इंबॉक्स में आएंगे, और जब आपको नकली-नाम की ज़रूरत ना रहे या ना चाहें, तो बस उसे बंद कर सकते हैं।
शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन इस्तेमाल करें
ज़्यादातर ऑनलाइन सर्विसेज़ आपके डाटा को अपराधी हैकर्स से बचाने के लिए एन्क्रिप्शन इस्तेमाल करती हैं, लेकिन चूंकि आपका डाटा उनके अपने सर्वर पे एन्क्रिप्ट किया जाता है, वो उसे मनमर्ज़ी से डीक्रिप्ट भी कर सकती हैं (और इसलिए उसे एक्सेस कर सकती हैं या यहां तक कि थर्ड पार्टी को सौंप भी सकती हैं)। उदाहरण के लिए, Google का Gmail आपको “ज़्यादा मददगार और पर्सनलाइज़्ड अनुभव” देने के लिए आपके सारे ईमेल(नई विंडो) स्कैन करता है(नई विंडो)।
शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन (E2EE) के साथ, आपका डाटा आपके डिवाइस पे ही एन्क्रिप्ट किया जाता है, इससे पहले कि उसे थर्ड पार्टी सर्वर को भेजा जाए। इसका मतलब है कि सिर्फ आप (या जिसे आपने अनुमति दी है) ही उसे डीक्रिप्ट कर सकते हैं। आप जो भी सर्विस इस्तेमाल कर रहे हैं, वो नहीं (Proton समेत)। इसलिए जहां भी मुमकिन हो E2EE इस्तेमाल करने से आपका डिजिटल फुटप्रिंट काफी कम हो जाता है। Proton E2EE प्रोडक्ट्स का एक सूट ऑफर करता है, जिनमें Proton Mail(नई विंडो), Proton Drive(नई विंडो), Proton Pass(नई विंडो), और Proton Calendar(नई विंडो) शामिल हैं।
ध्यान दें कि WhatsApp, Facebook Messenger, और iMessage जैसी सर्विसेज़ संदेश के कंटेंट को सुरक्षित रखने के लिए E2EE इस्तेमाल करती हैं, लेकिन वो बड़ी मात्रा में मेटाडाटा इकट्ठा करती हैं (जैसे आप किसे संदेश भेजते हैं, कब, और कितनी बार)। ज़्यादा निजता-केंद्रित मैसेंजर ऐप(नई विंडो) (जैसे Signal) इस्तेमाल करना आपका डिजिटल फुटप्रिंट कम करने के लिए कहीं बेहतर है।
तीसरें-पार्टी कुकीज़ ब्लॉक करें
ब्राउज़र कुकीज़ कई असल में उपयोगी काम करती हैं जो आपके ऑनलाइन अनुभव को बेहतर बनाती हैं, लेकिन तीसरें-पार्टी कुकीज़ एक छिपा खतरा हैं जिनका मकसद लगभग पूरी तरह अलग-अलग वेबसाइटों पे आपके व्यवहार को ट्रैक करना है। सौभाग्य से, ज़्यादातर आधुनिक ब्राउज़र आपको इन्हें ब्लॉक करने की अनुमति देते हैं।
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अंतिम विचार: शक हो तो ओपन सोर्स पर भरोसा करें
ऑनलाइन कुछ भी समय बिताने पे बिना डिजिटल फुटप्रिंट छोड़े रहना बेहद मुश्किल (दरअसल नामुमकिन) है। यहां तक कि इसकी कोशिश भी (उदाहरण के लिए Tor इस्तेमाल करके) इंटरनेट के बड़े हिस्से को रोज़मर्रा की गतिविधियों के लिए बेकार बना देती है। ऑनलाइन आप क्या करते और कहते हैं, इस पे आपका काफी कंट्रोल है (आपका एक्टिव डिजिटल फुटप्रिंट), लेकिन अपने गुप्त पैसिव फुटप्रिंट को संभालना कहीं ज़्यादा मुश्किल है (अक्सर इसलिए क्योंकि आपको इसकी खबर भी नहीं होती)।
फिर भी, बहुत सारे निजता-केंद्रित टूल उपलब्ध हैं (जिनमें Proton के टूल सबसे आगे हैं) जो आपको अपना पैसिव डिजिटल फुटप्रिंट संभालने और उसे छोटा करने में मदद कर सकते हैं। इनमें से सबसे अच्छे टूल ओपन सोर्स(नई विंडो) हैं, यानी कोई भी उनका कोड जांच सकता है ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि वो सुरक्षित हैं और सिर्फ वही कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए।
बेशक, ज़्यादातर लोगों के पास ये करने के हुनर नहीं हैं। एक आदर्श दुनिया में, सारा ओपन सोर्स कोड एक्सपर्ट्स द्वारा इंडिपेंडेंट ऑडिट होना चाहिए (जैसे Proton के सारे ऐप होते हैं), लेकिन बस इस तथ्य से कि इसे जांचा जा सकता है, इसमें कुछ हद तक भरोसा बनता है।






