IP पतों के बारे में वो सब जो आपको जानना चाहिए
Internet Protocol (IP) पता एक संख्यात्मक लेबल है जो इंटरनेट से कनेक्ट होने वाले हर डिवाइस की अनूठी पहचान करता है। इसका इस्तेमाल होता है:
- इंटरनेट से जुड़े किसी डिवाइस या नेटवर्क की पहचान करना
- पैकेट (जिनमें डाटा होता है) रूट करना ताकि वे किसी ऐसे डिवाइस या नेटवर्क तक पहुंच सकें जो इंटरनेट से कनेक्ट है
अगर आपका डिवाइस सीधे इंटरनेट से कनेक्ट होता है, तो उसका एक सार्वजनिक IP पता होता है जो इंटरनेट पे बाकी सबको दिखता है। सार्वजनिक IP पते वाले डिवाइसों के अच्छे उदाहरण हैं मॉडेम और वो सेल फोन जो सीधे इंटरनेट से कनेक्ट होते हैं।
अगर आपका डिवाइस किसी बीच के गेटवे डिवाइस के ज़रिए इंटरनेट से कनेक्ट होता है, तो उसका एक निजी IP पता होता है, और दुनिया को गेटवे डिवाइस का IP दिखेगा।
- IP पते कैसे काम करते हैं
- स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क
- IP पते बनाम डोमेन नाम
- IPv4 बनाम IPv6
- डायनामिक बनाम स्टैटिक IP पते
- मेरा IP पता क्या है?
- अपना IP पता कैसे छिपाएं या बदलें?
- IP पते का पता कैसे लगाएं
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IP पते कैसे काम करते हैं
डिवाइस और नेटवर्क Internet Protocol सूट (जिसे TCP/IP भी कहा जाता है) नामक मानकों और नियमों के सेट का इस्तेमाल करके इंटरनेट पे दूसरे डिवाइसों से जुड़ते और बातचीत करते हैं।
खुद internet protocol (IP) डाटा को पैकेट में एनकैप्सुलेट करता है जिन्हें सोर्स डिवाइस से इच्छित डेस्टिनेशन तक पहुंचाया जा सकता है, जिसकी पहचान पैकेट के हैडर(नई विंडो) में उसके IP पते से होती है।
IP पतों का प्रबंधन Internet Assigned Numbers Authority (IANA) करती है, जो Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN) का हिस्सा है, एक US-आधारित गैर-लाभकारी संगठन जिसकी मुख्य चिंता DNS सिस्टम बनाए रखना है।
AINA दुनिया भर की क्षेत्रीय इंटरनेट रजिस्ट्रियों(नई विंडो) (RIRs) को IP पतों के ब्लॉक आवंटित करती है, जो उन्हें आगे राष्ट्रीय और स्थानीय इंटरनेट रजिस्ट्रियों में बांटती हैं, और वे बदले में उन्हें अपने भौगोलिक क्षेत्र के इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) को देती हैं।

घरेलू ग्राहकों को उनके ISP को दिए गए IP पूल से IP पते दिए जाते हैं। क्योंकि ISPs आमतौर पे एक ही भौगोलिक क्षेत्र को IP पतों के ब्लॉक आवंटित करते हैं, कनेक्शन बनाने वाले IP पते के आधार पे इस बात का ठीक-ठाक अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कनेक्शन कहां से शुरू हुआ है।
हालांकि, ज़्यादातर घरेलू IPs डायनामिक होते हैं और इसलिए दोबारा आवंटित हो सकते हैं। इसलिए ऐसे अंदाज़ों की सटीकता की गारंटी नहीं दी जा सकती।
स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क
एक स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (LAN) कई डिवाइसों से बना होता है जो एक ही पोर्टल के ज़रिए इंटरनेट से कनेक्ट होते हैं। एक अच्छा उदाहरण है आम घर, जिसमें कई फोन, टैबलेट, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, और दूसरे डिवाइस होते हैं जो आपके ISP द्वारा दिए गए मॉडेम (जो अक्सर राऊटर भी होता है) के ज़रिए इंटरनेट से कनेक्ट होते हैं।

बाहरी दुनिया के लिए, लोकल नेटवर्क के सभी डिवाइसों का एक ही सार्वजनिक IP पता होता है — इंटरनेट पोर्टल (जैसे मॉडेम) का। LAN के भीतर के डिवाइस निजी IP पतों से पहचाने और संबोधित किए जाते हैं, जिन्हें एक राऊटर संभालता है (जो अक्सर वही मॉडेम होता है जिससे LAN इंटरनेट से जुड़ता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता)।
बड़े LAN अक्सर छोटे सबनेटवर्क में संगठित होते हैं जिनके अपने सबनेट IP पते होते हैं।
IP पते बनाम डोमेन नाम
IP पते संख्यात्मक लेबल हैं जिनका इस्तेमाल कंप्यूटर दूसरे कंप्यूटरों और नेटवर्क की पहचान के लिए करते हैं, लेकिन इंसानों के लिए इन्हें याद रखना आसान नहीं है। इसलिए इनकी जगह हम डोमेन नाम इस्तेमाल करते हैं, जो अक्षरांकीय पते हैं और कंप्यूटरों के इस्तेमाल किए IP पतों पे मैप होते हैं।
उदाहरण के लिए, URL https://www.protonvpn.com(नई विंडो) अभी IP पता 185.159.159.142 से मैप होता है। अगर आप 185.159.159.142 अपने ब्राउज़र के वेब एड्रेस बार में दर्ज करते हैं, तो वो आपको हमारी वेबसाइट पे ले जाएगा।
इस मैपिंग प्रोसेस को Domain Name System (DNS) कहा जाता है, और ये बहुत हद तक एक एड्रेस बुक जैसा काम करता है, जो डोमेन नामों को उनके संबंधित IP पतों से मिलाता है।
डोमेन नाम Uniform Resource Locator (URL) का हिस्सा होता है, जिसमें किसी इंटरनेट रिसोर्स से कनेक्ट होने के लिए इस्तेमाल किए गए प्रोटोकॉल (जैसे HTTPS(नई विंडो)) की जानकारी और डोमेन के भीतर किसी खास फ़ाइल (जैसे कोई खास HTML वेब पेज) का लिंक भी होता है।
IPv4 बनाम IPv6
आज Internet Protocol के दो वर्ज़न आम इस्तेमाल में हैं। पुराना Internet Protocol version 4 (IPv4) अब भी दूर-दूर तक सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला स्टैंडर्ड है। ये 32-बिट इंटरनेट पते इस्तेमाल करता है, यानी आवंटन के लिए 2^32 IP पते उपलब्ध हैं (कुल करीब 4.29 अरब)।
अफसोस की बात है कि पिछले कुछ सालों में उपलब्ध हुए इंटरनेट-सक्षम डिवाइसों की भरमार की वजह से ये IPv4 पते खत्म हो रहे हैं(नई विंडो)। दरअसल, सख्ती से कहें तो वे पहले ही खत्म हो चुके हैं(नई विंडो)। वर्कअराउंड (जैसे इस्तेमाल में न आ रहे IP पतों के ब्लॉक दोबारा आवंटित करना) ने सिस्टम को लड़खड़ाते चलने दिया है, लेकिन वे सिर्फ उसके नौटंकी अंत को टाल रहे हैं।
समाधान है नए Internet Protocol version 6 (IPv6) स्टैंडर्ड पे आना। ये 128-बिट इंटरनेट पते इस्तेमाल करता है, जिससे इंटरनेट पतों की अधिकतम उपलब्ध संख्या 2^128 (करीब 340 undecillion(नई विंडो)) हो जाती है, यानी बहुत सारे IP पते।
IPv6 पते हेक्साडेसिमल संख्या प्रणाली इस्तेमाल करते हैं और कुछ ऐसे दिखते हैं: 2001:db8::8a2e:370:7334।
अफसोस की बात है कि अपग्रेड की लागत, पीछे की संगतता की चिंताएं, और खुद की आलस्य की वजह से, भले ही ज़्यादातर आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम और नेटवर्क हार्डवेयर IPv6 की सहायता करता है, ज़्यादातर वेबसाइटें और ISPs अब भी नहीं करते। नतीजा ये है कि 2022 में प्रवेश के वक्त सिर्फ करीब 35%(नई विंडो) इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के पास IPv6 की एक्सेस है, और सिर्फ करीब 25%(नई विंडो) Alexa 500 वेबसाइटें (इंटरनेट की 500 सबसे लोकप्रिय वेबसाइटों की Amazon द्वारा बनाई गई सूची) इस स्टैंडर्ड की सहायता करती हैं।
इस समस्ये से निपटने में मदद के लिए, IPv6 वेबसाइटें दोहरे-अनुरूप तरीका अपनाती हैं। अगर IPv6 के ज़रिए जुड़ें तो वे कनेक्शन स्वीकार करती हैं, लेकिन अगर नहीं, तो वे डिफॉल्ट रूप से IPv4 कनेक्शन स्वीकार करती हैं।
डायनामिक बनाम स्टैटिक IP पते
डायनामिक IP पता बदल सकता है, और यही पते घरेलू IP पतों में बहुमत बनाते हैं। व्यावहारिक रूप से, ज़्यादातर ISPs IP पते बहुत बार नहीं घुमाते, तो आपके IP पते एक बार में सालों तक एक जैसे रह सकते हैं। लेकिन इसकी गारंटी नहीं है।
स्टैटिक IP पते के एक जैसे रहने की गारंटी होती है। ISPs आमतौर पे स्टैटिक IP पते उन व्यवसायों को किराए पे देते हैं जिन्हें उनकी ज़रूरत होती है। आम कारणों में शामिल हैं कॉर्पोरेट VPN चलाना जो रिमोट कर्मचारियों को कंपनी के रिसोर्स एक्सेस करने देता है, सर्वर होस्टिंग, VoIP संचार के लिए बेहतर भरोसेमंदता, भरोसेमंद जियो-लोकेशन ज़रूरतें, वगैरह।
मेरा IP क्या है?
अपना सार्वजनिक IP पता कैसे पता करें
आप हमारे मुफ्त सुरक्षित IP स्कैनर(नई विंडो).(नई विंडो) पे जाकर अपना सार्वजनिक IP पता आसानी से देख सकते हैं।

अपना निजी IP पता कैसे पता करें
आप अपने ऑपरेटिंग सिस्टम की कमांड लाइन का इस्तेमाल करके स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क पे डेस्कटॉप कंप्यूटरों का निजी IP पता आसानी से पता कर सकते हैं।
ज़्यादातर आजकल के राऊटर सिर्फ IPv4 पतों की सहायता करते हैं (आमतौर पे 192.169.x.x जैसे दिखते हैं), हालांकि IPv6 राऊटर उपलब्ध हो रहे हैं। अगर आपका राऊटर IPv6 की सहायता करता है, तो नीचे दिए गए कमांड दर्ज करने पे आपको IPv6 पता भी दिख सकता है।
Windows 10 और Windows 11
1. Start पे क्लिक करें और सर्च बॉक्स में powershell टाइप करें। जब ऐप सर्च रिज़ल्ट्स में दिखे, तो उसे Open करें (Run as Administrator एक्सेस की ज़रूरत नहीं है)।
2. नीचे दिया टाइप करें, फिर enter दबाएं:
ipconfig
अपना नेटवर्क इंटरफेस ढूंढें (जैसे आपका Wi-Fi या Ethernet कनेक्शन) → IPv4 पता (और IPv6 पता अगर आपका राऊटर सहायता करता है)।

macOS
Terminal खोलें और दर्ज करें:
ipconfig getifaddr en0

Linux
एक terminal खोलें और दर्ज करें:
hostname -I

मैं अपना IP पता कैसे छिपाएं या बदलें?
आपका IP पता आपका ISP आपको देता है। व्यावसायिक ग्राहक कभी-कभी अपने ISP से स्टैटिक IP पता खरीद सकते हैं, लेकिन घरेलू ग्राहकों के लिए ये आमतौर पे संभव नहीं है।
हालांकि, VPN इस्तेमाल करके इंटरनेट पे दूसरों से अपना IP पता छिपाना आसान है। ये आपका इंटरनेट कनेक्शन एक VPN सर्वर से रूट करता है ताकि आप अलग-अलग वेबसाइटों और ऐप्स से कनेक्ट करते वक्त आपके बजाय उसका IP पता दिखे।
वेबसाइटें देखते वक्त बेहतर निजता देने के अलावा, ये आपकी लोकेशन को छिपाना भी आसान बनाता है, और अक्सर आपको Netflix जैसी स्ट्रीमिंग सेवाएं एक्सेस करने देता है जैसे आप उस देश में हों जहां VPN सर्वर है, ताकि आप वह कंटेंट एक्सेस कर सकें जिसके आप सब्सक्राइब हैं।
VPNs के बारे में और जानें(नई विंडो)
आप Proton VPN जैसे मुफ्त VPN से अपना IP पता छिपा सकते हैं। हमारे Free plan के साथ, आप बिना डाटा लिमिट और बिना कृत्रिम स्पीड लिमिट के स्विस-आधारित नो-लॉग्स निजता का आनंद ले सकते हैं। (हमारे नवीनतम सुरक्षा ऑडिट के नतीजे हमारी नो-लॉग्स नीति की पुष्टि करते हैं।) पेड Proton VPN plan में अपग्रेड करने से आपको बेहतर स्पीड परफॉर्मेंस, बहुत ज़्यादा VPN सर्वर लोकेशन तक एक्सेस, और कई एडवांस खासियतें मिलेंगी।
Tor नेटवर्क(नई विंडो) भी इसी तरह आपका असली IP पता छिपा देता है, लेकिन जिन लोगों को चाहिए उनके लिए अमूल्य गुमनामी टूल होते हुए भी, ये रोज़ के इस्तेमाल के लिए बहुत धीमा है।
IP पते का पता कैसे लगाएं
आप डेस्कटॉप कंप्यूटर पे कमांड लाइन का इस्तेमाल करके किसी भी वेबसाइट का IP पता आसानी से पता कर सकते हैं। बस CMD या PowerShell (Windows), Terminal (macOS या Linux), या Crosh (Chrome OS, CTRL + ALT + T इस्तेमाल करके) खोलें और दर्ज करें:
ping [डोमेन नाम]
उदाहरण के लिए:
ping www.protonvpn.com

(टारगेट सर्वर को पैकेट भेजना रोकने के लिए Ctrl+C दबाएं।)
अंतिम विचार
आपका IP पता इंटरनेट पे आपकी अनूठी पहचान करता है और वेबसाइटों और जिससे भी आप कनेक्ट होते हैं, उन्हें आपकी अनुमानित भौगोलिक लोकेशन का सटीक अंदाज़ा लगाने का तरीका देता है। इंटरनेट पे अपनी निजता बेहतर करने के लिए, इसलिए आपको अपना असली IP पता छिपाने के लिए VPN इस्तेमाल करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
TCP का मतलब है Transmission Control Protocol, और Internet Protocol (IP) के साथ मिलकर ये Internet Protocol सूट बनाते हैं (जिसे अक्सर TCP/IP भी कहा जाता है)। कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल का ये सूट कंप्यूटरों को इंटरनेट पे आपस में बात करने देता है।
हां। जब तक आप अपना IP पता छिपाने के कदम नहीं उठाते, आप इंटरनेट पे जिस भी रिसोर्स से कनेक्ट होते हैं, वो आपका असली अनूठा IP पता देख सकता है। इसमें वेबसाइटें, ईमेल सर्वर, गेम सर्वर, और टोरेंट पीयर्स शामिल हैं।
अगर आप किसी ऐसे स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क पे हैं जो मॉडेम के ज़रिए इंटरनेट से जुड़ता है, तो इंटरनेट पे सबको दिखने वाला सार्वजनिक IP पता मॉडेम का होता है, आपके अपने डिवाइस का नहीं।
राऊटर आपके डिवाइस को सिर्फ-अंदरूनी वाला IP देता है ताकि वो लोकल नेटवर्क पे उस डिवाइस तक पैकेट रूट कर सके। यही आपका निजी IP पता है।
आम तौर पे सिर्फ स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क के भीतर के डिवाइस ही आपका निजी IP पता देख सकते हैं, हालांकि इसके इंटरनेट पे उजागर होने के तरीके हैं (उदाहरण के लिए WebRTC के ज़रिए)। लेकिन ये कोई समस्या नहीं है, क्योंकि आपके निजी IP पते में कोई ऐसी व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी नहीं होती जो इंटरनेट पे आपकी निजता से समझौता कर सके।
IPv6 सिर्फ इस मायने में बेहतर है कि IPv6 पते बहुत ज़्यादा हैं। IPv6 परफॉर्मेंस नहीं सुधारता और एंड-यूज़र्स के लिए कोई और फायदा नहीं देता, और इसी वजह से इसकी अपनाने की रफ्तार धीमी रही।






