डाटा ताकत है। इसी वजह से Google और Facebook जैसी बड़ी टेक कंपनियां “फ्री” प्रोडक्ट ऑफर करके भी पूरे देशों की मिली-जुली आर्थिक उपज से ज़्यादा राजस्व कमा लेती हैं। मिसाल के तौर पे, Google की मुख्य कंपनी Alphabet का 2024 का सालाना राजस्व $350 अरब(नई विंडो) था, जबकि ग्रीस की 2025 की GDP का अनुमान $267 अरब(नई विंडो) है।
लेकिन एक उभरता कॉन्सेप्ट ऐसा भी है जो निजी डाटा पे कंट्रोल वापस उपयोगकर्ताओं को दे सकता है। इसे डिजिटल आत्मनिर्णय(नई विंडो) के नाम से जाना जाता है। ये कॉन्सेप्ट आपके व्यक्ति के रूप में अपने निजी डाटा पे कंट्रोल करने के अधिकार पर ज़ोर देता है और आपको ये तय करने की आज़ादी देता है कि आपकी जानकारी कैसे इकट्ठी, इस्तेमाल और शेयर की जाए।
पारदर्शिता, समावेशन और उपयोगकर्ता कंट्रोल को तरजीह देने वाले कानूनी ढांचे और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में ब्राज़ील लंबे समय से सबसे आगे रहा है, जैसे उसकी open banking(नई विंडो) पहल और Pix इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम(नई विंडो)। अब वो लोगों को उनके निजी डाटा पे सीधा कंट्रोल देने की दिशा में एक कदम उठा चुका है, ताकि उस डाटा को सिर्फ सुरक्षित ही न किया जाए, बल्कि उससे कमाई भी हो सके।
एक सरकारी डाटा कंपनी(नई विंडो) की नई पहल से ब्राज़ीलवासी अपना निजी डाटा संभाल सकते हैं और उसे बेच भी सकते हैं, जिससे वो संसाधन, जिसे कभी टेक कंपनियां अपने पास जमाकर रखती थीं, अब खुद लोगों की अपनी संपत्ति बन गया है।
ये ऐसी पहली पहल नहीं है, जैसा कि हम आगे चर्चा करेंगे, लेकिन इसमें सरकारी सहायता और इंडस्ट्री के मज़बूत समर्थन का मेल होने की वजह से कई निगरानीकर्ताओं को लगने लगा है कि ये अपनी तरह की पहली पहल हो सकती है, जिसे बड़े पैमाने पे अपनाया जाए। ये रुझान दर्शाता है कि डिजिटल निजता के बारे में सोचने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, जो व्यक्ति को सशक्त बनाते हैं और साथ ही कंपनियों को वो डाटा भी देते हैं जिसे वो अपनी व्यावसायिक सफलता के लिए ज़रूरी मानती हैं।
- डिजिटल आत्मनिर्णय क्या है?
- डिजिटल आत्मनिर्णय क्यों अहम है
- ब्राज़ील डिजिटल आत्मनिर्णय की तरफ कैसे काम कर रहा है
- डिजिटल आत्मनिर्णय के दूसरे प्रोजेक्ट
- डिजिटल आत्मनिर्णय का इस्तेमाल कैसे करें
- एक चुनौती, एक प्रोटोटाइप और शायद भविष्य
डिजिटल आत्मनिर्णय क्या है?
डिजिटल आत्मनिर्णय व्यक्तियों और समुदायों का वो अधिकार और क्षमता है, जिसके ज़रिए वो तय कर सकते हैं कि डिजिटल दुनिया में उनके निजी डाटा और डिजिटल पहचान का इस्तेमाल, शेयर और प्रतिनिधित्व कैसे किया जाए।
ये अवधारणा आत्म-निर्णय(नई विंडो) के व्यापक दार्शनिक विचार से जुड़ी है, जो अपनी ज़िंदगी को प्रभावित करने वाले फैसले लेने में लोगों की स्वायत्तता और एजेंसी पे ज़ोर देता है (और खुद भी मानवाधिकारों(नई विंडो) की अवधारणा से जुड़ा है)। डिजिटल आत्म-निर्णय के प्रमुख पहलू ये हैं:
अपने पर्सनल डाटा पे कंट्रोल
आपको फैसला करने का हक होना चाहिए कि आप कौन सा पर्सनल डाटा शेयर करें, किसके साथ और किस मकसद से। इसमें डाटा कलेक्शन के लिए सहमति देने और कभी भी सहमति वापस लेने का हक भी शामिल है।
पारदर्शिता और सूचित सहमति
संगठनों को आपके पर्सनल डाटा को कैसे कलेक्ट, स्टोर और प्रोसेस किया जाता है, इस बारे में साफ और पारदर्शी जानकारी देनी चाहिए, ताकि आप समझ सकें कि वो डाटा किस तरह इस्तेमाल हो रहा है और उसे शेयर करने के क्या संभावित नतीजे हो सकते हैं।
डाटा का स्वामित्व और पोर्टेबिलिटी
आप अपना पर्सनल डाटा एक्सेस कर सकें और उसे आसानी से अलग-अलग सर्विसेज़ या प्लैटफॉर्म के बीच ट्रांसफर कर सकें। इससे ये पक्का होता है कि आप किसी खास सर्विस में बंद न हों और अपने डाटा पे कंट्रोल बनाए रखें।
भुला दिए जाने का हक
आपको ये हक होना चाहिए कि आप संगठनों से कह सकें कि वो आपका डाटा अपने सिस्टम से मिटा दें। ये खास तौर पे तब ज़रूरी है जब आपका डाटा ज़रूरी न रह गया हो या आपने सहमति वापस ले ली हो।
डिज़ाइन के ज़रिए निजता
डिजिटल सर्विसेज़ और प्रोडक्ट्स को शुरुआत से ही उपयोगकर्ताओं की निजता और डाटा की सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि डेवलपमेंट प्रोसेस में निजता की खासियतें और सुरक्षा उपाय शामिल किए जाएं, ताकि डाटा कलेक्शन कम से कम हो और जो डाटा कलेक्ट हो उस पे उपयोगकर्ताओं का कंट्रोल ज़्यादा से ज़्यादा हो।
डिजिटल आत्म-निर्णय क्यों ज़रूरी है
अभी मोनोपॉली वाली टेक दिग्गज कंपनियां हमारे सबसे निजी डाटा को इकट्ठा करके और उसका फायदा उठाकर खूब पैसा कमा रही हैं। ये कंपनियां एक बार हमारा डाटा कलेक्ट कर लें, फिर उस पे हमारा कोई कंट्रोल नहीं रहता। उस डाटा का इस्तेमाल हम तक टारगेटेड ऐड्स पहुंचाने, हमारी निजता का उल्लंघन(नई विंडो) करने और यहां तक कि हमारे साथ भेदभाव(नई विंडो) करने के लिए भी हो सकता है। लेकिन डिजिटल आत्म-निर्णय के पक्ष में एक और बड़ी दलील है।
डिजिटल आत्म-निर्णय लोगों को एक ऐसी दुनिया में स्वायत्त बने रहने देता है, जहां डिजिटल सिस्टम अक्सर बिना किसी पारदर्शिता या जवाबदेही के हमारी तरफ से काम करते हैं। अपनी डिजिटल ज़िंदगी के बारे में सूचित फैसले लेने की आज़ादी हमारे पास हो, ये इसलिए ज़रूरी है क्योंकि तभी हम एक ऐसी दुनिया में रह सकते हैं जहां टेक्नोलॉजी सभी लोगों के हितों और मूल्यों की सेवा करे। इसलिए ये निजता, लोकतंत्र और मानवाधिकारों की एक ज़रूरी सुरक्षा है।
ब्राज़ील डिजिटल आत्म-निर्णय की तरफ कैसे कदम बढ़ा रहा है
Dataprev(नई विंडो) (Empresa de Tecnologia e Informações da Previdência Social) ब्राज़ील की एक सरकारी कंपनी है, जो मुख्य तौर पे देश के सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के लिए टेक्नोलॉजी और जानकारी की सर्विसेज़ देती है। मई 2025 में इसने DrumWave के साथ मिलकर, डाटा की कीमत तय करने और उससे कमाई करने में माहिर सिलिकॉन वैली की एक टेक कंपनी, एक “अभूतपूर्व डाटा प्रॉपर्टी मैनेजमेंट पहल” का एलान किया(नई विंडो)।
dWallet नाम से शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट ब्राज़ील के नागरिकों को डिजिटल आत्म-निर्णय की काफी हद तक आज़ादी देना चाहता है, जिसमें अपना डाटा बेचने का हक और तरीका भी शामिल है। एक पायलट स्कीम के तौर पे शुरू हुआ dWallet एक डिजिटल “डाटा सेविंग्स खाता” है, जो ब्राज़ील के लोगों को अपना पर्सनल डाटा जमा करने, संभालने और उससे कमाई करने की सुविधा देता है (शुरुआत में पेरोल लोन से जुड़ी जानकारी के साथ)।
dWallet कैसे काम करता है
जब dWallet के उपयोगकर्ता इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, तो उनका बनाया गया पर्सनल डाटा एक सुरक्षित डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। फिर कंपनियां इस डाटा को एक्सेस करने के लिए पैसे वाले ऑफर भेज सकती हैं, जिन्हें उपयोगकर्ता अपनी मर्ज़ी से, एक-एक ऑफर के हिसाब से मंज़ूर कर सकते हैं।
डाटा की क्वालिटी, जिसे DrumWave के अपने DIM (Data Information Meaning) इंडेक्स से आंका जाता है, जितनी बेहतर होगी, कंपनियां उतनी ही ज़्यादा रकम देने की संभावना रखती हैं। ऐसे देश में जहां औसत मासिक तनख्वाह $530 है(नई विंडो), इसे सबसे पहले अपनाने वाले लोग पहले से ही महीने के करीब $50 कमा रहे हैं(नई विंडो), ऐसे डाटा का एक्सेस देकर, जिसके बनते होने की उन्हें पहले जानकारी तक नहीं थी।
DrumWave का उपयोगकर्ताओं के डाटा तक कोई सीधा एक्सेस नहीं है।
प्रतिक्रिया
ये अभी देखना बाकी है कि पायलट प्रोजेक्ट सफल होगा या नहीं। आलोचक ब्राज़ील की गहरी डिजिटल खाई(नई विंडो) की तरफ इशारा करते हैं, जहां करीब 2.56 करोड़ लोग गांवों में रहते हैं(नई विंडो), जहां इंटरनेट का बुनियादी ढांचा नहीं के बराबर है और बुनियादी साक्षरता दरें भी बेहद कम हैं (ऐसी स्कीम से सही फायदा उठाने के लिए जो डिजिटल साक्षरता चाहिए, उसका तो ज़िक्र ही छोड़ दें(नई विंडो))। dWallet इस खाई को और गहरा कर सकता है, जिससे अपेक्षाकृत अमीर और टेक-साक्षर शहरी आबादी को तो फायदा मिलेगा, लेकिन समाज के सबसे गरीब और सबसे कमज़ोर तबके पीछे छूट जाएंगे।
इसकी चिंता भी है कि बड़ी, कामयाब कंपनियां छोटे कारोबारों, स्टार्ट-अप्स और कम बजट वाले सरकारी विभागों से ज़्यादा बोली लगाने में सफल होंगी, जिससे उन्हें उस डाटा तक एक्सेस से असरदार तौर पे बाहर रखा जाएगा जो आज के डिजिटल दौर में संगठनों के कामयाब होने के लिए ज़रूरी है।
एक ज़्यादा दार्शनिक स्तर पे, हालांकि ये लोगों को उनके डाटा पे अपनी इच्छा और चुनाव का अधिकार देता है, ये डाटा अब भी Big Tech के मुनाफ़े के लिए इस्तेमाल हो रहा है (इसीलिए कंपनियां इसके लिए खूब पैसे देने को तैयार हैं)। और जब समाज के अक्सर सबसे कमज़ोर तबकों के लोग अपना डाटा बेचकर अपनी मासिक कमाई में ठीक-ठाक इज़ाफा कर सकते हैं, तो असली चुनाव एक ऐसी चीज़ है जो सिर्फ पहले से अच्छे हालात वाले ही खरीद पाएंगे।
लेकिन फायदे में हो या नुकसान में, ये बात कि dWallet डिजिटल स्व-निर्णय को राष्ट्रीय स्तर पे संस्थागत रूप देने वाली पहली स्कीम है, इसे व्यापक रूप से अपनाए जाने की सबसे अच्छी संभावना देती है।
डिजिटल स्व-निर्णय के दूसरे प्रोजेक्ट
ब्राज़ील अकेले काम नहीं कर रहा है। EU के GDPR(नई विंडो) (और ब्राज़ील का उसका अपना क्रियान्वयन, LGPO(नई विंडो)) जैसी सरकार-समर्थित पहलों ने लोगों के पर्सनल डाटा की सुरक्षा के मामले में ठोस प्रगति की है। लेकिन कई लोग आगे जाना चाहते हैं, और बातचीत को लोगों की सुरक्षा से हटाकर उन्हें सक्षम बनाने पे केंद्रित करना चाहते हैं। इस क्षेत्र में अन्य उल्लेखनीय पहलों में शामिल हैं:
डिजिटल सेल्फ-डिटरमिनेशन नेटवर्क(नई विंडो)
स्विस फेडरल डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स (FDFA) और फेडरल ऑफिस ऑफ कम्युनिकेशन्स (OFCOM) द्वारा लॉन्च किया गया ये सरकार-समर्थित इनीशिएटिव इस विचार पे आधारित है कि नागरिकों को अपने डाटा पे नियंत्रण बनाए रखना चाहिए — खासकर ट्रांस-बॉर्डर संदर्भों में। इसे पाने के लिए, ये नेटवर्क भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम को बढ़ावा देता है जो पर्सनल ऑटोनमी, डाटा सॉवरेनिटी और डेमोक्रेटिक मूल्यों का सम्मान करते हैं।
DECODE(नई विंडो)
EU के Horizon 2020 कार्यक्रम के तहत फंड किया गया DECODE (DEcentralised Citizen-Owned Data Ecosystem) प्रोजेक्ट डिजिटल सेल्फ-सॉवरेनिटी में एक अग्रणी प्रयोग है, जो डाटा की मालिकियत, उपयोग और पहचान के लिए एक प्राइवेसी-फर्स्ट, नागरिक-नियंत्रित आर्किटेक्चर ऑफर करता है।
टैम्पर-प्रूफ, पारदर्शी डाटा शेयरिंग सिस्टम बनाने के लिए ब्लॉकचेन और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी(नई विंडो) (DLT) का उपयोग करते हुए, एम्सटर्डम और बार्सिलोना में असली-जिंदगी के पायलट ने लोगों की निजता की सुरक्षा में इसकी तकनीकी व्यवहार्यता और मूल्य पहले ही दिखा दिया है।
Solid(नई विंडो)
टिम बर्नर्स-ली (वर्ल्ड वाइड वेब(नई विंडो) के आविष्कारक और Proton एडवाइजरी बोर्ड मेंबर(नई विंडो)) के नेतृत्व में, Solid (Social Linked Data) एक ओपन-सोर्स, W3C-मानकीकृत(नई विंडो) फ्रेमवर्क है जिसका उद्देश्य व्यक्तियों को ऑनलाइन उनके पर्सनल डाटा पर पूरा नियंत्रण देना है, इसे डिसेंट्रलाइज़्ड “पॉड्स” में स्टोर करने की अनुमति देकर, जिन्हें वे खुद होस्ट करते हैं (पर्सनल सर्वर, क्लाउड सर्विस, या प्रोवाइडर के जरिए)। जब ऐप या सर्विस एक्सेस मांगती है, उपयोगकर्ता कभी भी स्पष्ट रूप से इसे दे या वापस लें सकते हैं।
डिजिटल सेल्फ-डिटरमिनेशन का अभ्यास कैसे करें
ज़्यादातर डिजिटल सेल्फ-डिटरमिनेशन प्रोजेक्ट अभी भी प्लानिंग और सीमित-पायलट स्टेज पर हैं, और आपके पर्सनल डाटा को दुरुपयोग से बचाने पे फोकस करते हैं। dWallet अभी काफी खास है क्योंकि ये आपको अपने पर्सनल डाटा को मॉनेटाइज़ करने की क्षमता देता है, लेकिन ये ब्राज़ील के लोगों तक सीमित है।
हालांकि, तीसरें-पार्टी के अपने डाटा तक एक्सेस को प्रतिबंधित करने और कम से कम कुछ डिजिटल सेल्फ-डिटरमिनेशन हासिल करने के लिए आप व्यक्तिगत रूप से कई कदम उठा सकते हैं:
- Solid प्रोजेक्ट सबके लिए उपलब्ध है, और आप अभी एक पॉड ले सकते हैं।
- जहां भी संभव हो शुरु-से-अंत तक एन्क्रिप्शन(नई विंडो) का उपयोग करें ताकि सिर्फ आप अपने डाटा को एक्सेस कर सकें।
- दूसरों के साथ कम्युनिकेट करने के लिए zero(नई विंडो)–access encryption ईमेल सर्विस(नई विंडो) और एक सुरक्षित मैसेजिंग ऐप(नई विंडो) (जैसे Signal) का उपयोग करें।
- एक ऐसा ब्राउज़र उपयोग करें जो आपकी निजता का सम्मान करता है(नई विंडो)।
- आपके विज़िट की गई वेबसाइटों से अपना IP पता छिपा देने और अपने ISP से अपना ब्राउज़िंग हिस्ट्री छिपाने के लिए एक VPN का उपयोग करें।
- वेब पर वेबसाइटों को आपको ट्रैक करने से रोकने के लिए Proton VPN के NetShield Ad-blocker या uBlock Origin जैसे DNS ब्लॉकर का उपयोग करें।
- ऑनलाइन सर्विस को उनके ऐप के बजाय उनकी वेबसाइट के जरिए एक्सेस करें।
- उन ऐप के लिए जिनके बिना आप नहीं रह सकते, नियमित रूप से उनकी परमिशन चेक करें।
अंतिम विचार: एक उकसावा, एक प्रोटोटाइप, और शायद भविष्य
जब दुनिया डाटा की मालिकियत के नैतिक निहितार्थों से जूझ रही है, ब्राज़ील की dWallet पहल सरकारों के लिए डाटा, पहचान और व्यक्तिगत सशक्तीकरण से जुड़ने का एक नया तरीका बता सकती है। नागरिकों को अपने पर्सनल डाटा को रखने और मॉनेटाइज़ करने में सक्षम करके, ब्राज़ील सिर्फ एक नई टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग नहीं कर रहा है — ये संभावित रूप से ये परिभाषित कर रहा है कि हम अपने डिजिटल एसेट्स की मालिकियत और नियंत्रण के बारे में कैसे सोचते हैं।
पारंपरिक सिस्टम के विपरीत, जहां प्लेटफॉर्म बंद दरवाज़ों के पीछे डाटा निकालते और मॉनेटाइज़ करते हैं, dWallet शक्ति लोगों में डालता है — सहमति, पारदर्शिता और आर्थिक मूल्य उनके हाथों में रखता है। इसके समर्थकों के लिए, ये मॉडल सिर्फ व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं को फायदा नहीं देता; ये वैश्विक स्तर पर नैतिक डाटा अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक ब्लूप्रिंट सेट करता है। इसके आलोचकों के लिए, ये अभी भी Big Tech को लोगों के डाटा का शोषण करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
वैश्विक स्तर पर सफल होने के लिए, ये मॉडल कई चुनौतियों का सामना करता है, जैसे कुछ ऐसे संगठनों की बेहद मज़बूत प्रतिक्रिया का सामना करते हुए व्यापक अपनाने को बढ़ावा देना जो इस ग्रह ने अब तक देखे हैं। डिजिटल डिवाइड को पाटने की भी तत्काल ज़रूरत है, ताकि हर कोई इसका लाभ उठा सके।
ब्राज़ील का dWallet फिर भी तकनीकी विकास और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाने के लिए अन्य देशों के लिए एक दिलचस्प मिसाल कायम करता है।






